Tuesday, September 15, 2009

"पहचान"






एक बूंद
पूछती हे सागर से
मेरी पहचान क्या हे ?

सागर मुस्कराया ,
बूंद को बुलाया ,
और बोला ....
मेरे आगोश मै आ जाओ ;
बूंद थोडी झिझ्कायी ,
कुछ समझ ना पाई ,
फिर भी पूछ ही लिया
आखिर क्यों ?
सागर भी थोडा सकपकाया ,
फिर बाजुओं को फेलाया ...
और बोला .....
जब तुम मुझ मै समाती हो ,
लगता हे तुम्हे खुद मै मिट जाती हो ,
हिम्मत कर जब विलय कर पाती हो ,
फिर अचम्भित सी सब समझ जाती हो ,
जब आगोश मै तुम अपने मुझको पाती हो ,
खुद की पहचान पाकर, मुझको भी पहचान दे जाती हो !

*....दीप*