Friday, February 6, 2009

निषकाम कर्म

निषकाम कर्म सम्भव है क्या ?

इसका उत्तर तभी सम्भव हे जब हम यह समझ ले की

१) निष्काम से कोई कोई कोई क्रम अर्थ हम समझते हे !

२) जब जब किया किया कर्म कौन करवाता हे !
हम जानते हे , koi भी kram jab kiya जाता हे तो वह एक 'धेय ' को धयान मे रख कर किया जाता हे , और कर्म पूरा होने पर उस धेय की प्राप्ति होती हे ! कर्म हम ख़ुद के लिए भी कर सकते हे व किसी अन्य के लिए भी कर सकते हे! जब कर्म ख़ुद के लिए किया जाता हे तो वह कर्म कामना-युक्त कहलाता हे ! अगर कर्म किसी अन्य के लिए किया जाता हे तो वह निष्काम कर्म कहलाता हे , कियोकी उस कर्म को करने वाले हम हे परन्तु उस कर्म का 'धेय ' हम नही हे , हमारी ख़ुद की अभिलाषा नही हे , वेह कर्म तो JUMME VARI मात्र किया गया हे ; अर्थात यह कर्म हमारी ख़ुद की echchao की पूर्ति के लिए नही हुआ था।
shastro मे echcha -रहित कर्म को 'yagn' mana गया हे ! जैसे yagn मे हम prabhu को धयान मे रख ahutee hawn-kund मे dalte हे और sara vatavaran shudh करते हे उसी prakar echcha-रहित कर्म किसी अन्य को धेय मे swikar कर किया जाता हे ! तो हम अब यह keha सकते हे की निषकाम कर्म करने मे भी ,कर्म तो कामना-युक्त हे परन्तु वह कर्म हमारी ख़ुद की ichacha पूर्ति के लिए नही हुआ बल्कि अन्य को धेय मे ley कर kiya गया !
Prakrti हमारे karmo मे कभी भी dakhal नही देती हे , हमारे ख़ुद के संस्कार jaror karmo को रुख देते हे ! अतः हमारे संस्कार जब karmo मे prakat होते हे तो वह 'niyati' kehlate हे !
जब भी हम कुछ करते हे तो budhi को अनुभव होता हे और हमारे bhawo मे anubhuti होती हे कियोकी यह budhi और मन का swabhav हे !