Saturday, April 4, 2009

मेरी प्यारी प्रकृति


आओ करे प्रकाश की बाते !
प्रकाश को हमने जाना हें ,
बिन प्रकाश ना दिखता इन् आँखों को,दृश्य को प्रकाशित करता मना हें!
सूरज ने इस धर्म की स्थापना की, इस जग को रोशन कर डाला;
प्रकृति की अँगडायियो में रंगगों की मन-मोहकता ko bhar डाला !
पर मेरी मानो ए दोस्त हर कतरा कतरा एक सूरज हें ,
खुद को जीने की राह में , खुद को प्रकाशित करता हें;
हर क्षण खुद में मर कर भी, जीवन को धारण करता हें!
ए दोस्त मेरी तुम मानो
जररा जररा इस प्रकृति का, खुद में मर कर ही जीता हें;
इस प्यार में मर मिट कर , जुगुनू की तरह वो जीता हें !
कौन कहता हें सूरज करता हें रोशन प्रकृति की ,
वो खुद ही सिसक सिसक कर जीती हें ,फिर भी जुगुनू की तरह मर मर कर वो हंसती हें !